मंगलवार, 31 अक्टूबर 2017

                                                 
                                                 जीवन  एवं शोध : अनूठा सम्बन्ध 


कभी जब मन प्रसन्न हो तो ,तब शब्दों  को सवारने को जी चाहता है ,   
और कभी मन जब खिन्न हो, तो उन्ही   शब्दों  में उलझने को जी चाहता है 11

एक शोधकर्ता की भांति काफी मन्गरत  कल्पनाएं कर लेती हूँ मैं ,
और उन्ही कल्पनाओं मे हर वक़्त दूसरी परिकल्पना  नकारने को  जी चाहता हैं 11  

कभी -कभी बिना किसी उदेशय के भी शोध करने को जी चाहता हैं ,
 और कभी इंसानो कि  आँखों मे दबी आवाज़ को पहचाने को जी चाहता है  11 

जो जीवन रुपी शोध  मात्र  ,उलझे हुए  उद्देश्य,परिकल्पनाओं ,
और बात साबित करने पर ही हो,  तो वह सत्य नहीं  महज  मिथ्या है 11  

अगर बात साबित हो जाये तो आप प्रशिष्टावान  ,
अगर तालिया न बजे तो आप बस बूत  समान 11 

ज़रूरी नहीं की महज़ चंद  आँकड़े ही आपके शोध का स्तर बताये ,
 उसी तरह ज़रूरी नहीं की जीवन की  सारी परिकल्पनाएं  हमारे  मुताबिक ही ढल जाये 11 

जीवन भी तो परिकल्पनाएं का सार हे जो शोध की भांति ,
 कुछ ढूंढ़ने और कुछ  पाने पर  ही ख़त्म हो जाता हे 11 

कुछ  लिखते -लिखते कभी  एकांत रहने  को जी चाहता हैं,  
और कभी एकांत मे भी शोर ढूंढने को जी चाहता हैं 11 

कभी जीवन रूपी शोध मे ,अपने और करीब आने को जी चाहता  हैँ,
और कभी इस जीवन रूपी शोध को ,एकांत मे यूँही बस  निहारने को जी चाहता  है  11  





शनिवार, 1 जुलाई 2017


बारिश  कि  बूंद 


इंतज़ार था जिसका वह आखिर आ ही गयी
कभी मंद ,कभी तेज़ सा था आगाज़ उसका 1  
वह थी  सहमी सी  ,धरती पर आकर 
पुकार रहा हैं इंसान, उसे  हाहाकार मचाकर11  

बारिश की वह बूंदे भी ,खूब  लम्बा सफर तय कर आई होंगी 
कहीं झमाझम बरसकर वह आगे बढ़ गयी होंगी 1 
फिर कहीं नन्हे बच्चे को गर्मी से बेहाल देख 
ममता लिए आँसुओ के रूप मे वही ठहर गयी होंगी 11 

धरती को सूखता देख ,उसका दिल भर  आता  होगा  
क़र्ज़  मे  डूबे किसानो की बेबसी भरी आँखे देख 
उसका दिल बैठ जाता होगा 11 

फिर झमाझम बरस पड़ती  होंगी वह
 किसी  सूखते पोखर की प्यास  बुझाने 1 
 शायद किसी को आत्महत्या से बचाने,
शायद किसी का परिवार बचाने   11 

जब महसूस करुँ  इन बूंदो को ,तो यह अंदर तक समां जाती हे 
जब ना करुँ  तो यह रेत की तरह फिसल जाती   हें 1 
कभी यह चुपचाप से आती हैं ,कभी यह   क्रोधित हो जाती हें 
किसानो के लिए यह त्यौहार बन जाती हें ,
और हमारे लिए सावन का आगाज़ बन  जाती हे 11 


काश ! यह बारिश मेरे आँगन  में ही ठहर जाये 
ताकि देख सकू और करीब से धान की उन फसलो को 1 
ताकि देख सकू और करीब से सुकून  भरे पशु -पक्षियो को 
जो  कबसे आस लगाए बैठे  थे  बादल के  बरसने का 11