सोमवार, 14 सितंबर 2020

सांझ 


उस सांझ की मद्धम धूप  में,  एक सुकून दिखाई देता  है 

शांत सांझ से मिल जाऊ, तो नया शोर सुनाई देता है 

दफ्तरों  कि लालफ़ीताशाही में ,सांझ कहीं  बेदाग़ सा लगता है 

तंग लिबास पहने लोगो को ,सांझ में दो पल फुरसत सा लगता है 



सांझ अपने अंदर दिन और रात  का सामंजस्य बनाये रहता है 

सांझ की  चाय में  अक्सर  सरकार या इज़हार का चर्चा सा  रहता  है  

शतरंज के चौपाट के समान  सांझ दो रंगो को समायें हुए सा लगता है 

शतरंज  के चौंसठ  चौरस जैसा  सांझ भी कौटिल्य सा  लगता है  

 






















































































































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