अलौकिक गाथा
अलौकिक भारत की यह गाथा है,
सिंहासन के लिए जहाँ संग्राम का आगाज़ हैं,
रणभूमि कुरुक्षेत्र जिसमे हस्तिनापुर का लहू सुर्ख लाल हैं,
पांडवो और कौरवो ने जहाँ अधिक खोया,कम पाया हैं 11
शांतनु से नीव पड़ी जिस युद्ध संग्राम की,
ना देता बिन सोचे वह वचन सत्यवती को मोह में ,
तो शायद महाभारत का हर अध्याय ही अलग होता,
भीष्म पितामह के सिर हस्तिनापुर का मुकुट होता 11
जहाँ राज्य मोह से अधिक धृतराष्ट का पुत्र मोह बलवान हैं ,
जहाँ दुर्योधन के अभिमान का,कर्ण के त्याग का,एकलव्य की गुरुभक्ति का,
अर्जुन के शौर्य का ,शकुनि के छल का सबको भली भांति ज्ञान हैं ,
जहाँ लाक्षागृह्य के जलकर भी ,विदुर नीति से पांडव पुत्र कुशल लौट आये थे,
जहाँ गिरिधर की लीलाएं हैं , नारायण से सारथि बने वे जहाँ 11
जहाँ पांचाली का अपमान हैं,पांडवो का परिहास हैं ,
जहाँ भीष्म पितामह का चिंतित करता मौन विराजमान हैं,
जहाँ गांधारी शिव भक्तिन के सौ पुत्रो का विनाश हैं,
टाला जा सकता था महा संग्राम जहाँ ,
लेकिन उस युद्ध के इच्छुक थे अनेक जहाँ 11
यह युद्ध संग्राम कहीं रुका नहीं ,
दिन पर दिन होता गया युद्ध और विकराल जहाँ ,
संजय की दृष्टि से देखता धृतराष्ट युद्ध जहाँ,
हैं धैर्य खोता, देखकर अपने वंश का अंत जहाँ,
भीष्म पितामह पर पूरी महाभारत घूमती रहती हैं,
हैं अपनी प्रतिज्ञा से विवश जहाँ , शंख युद्ध का बजा दिया 11
यह ग्रन्थ सीखा गया कई, पाठ जीवन के भी,
अधिक मोह मे आकर बिन सोचे शांतनु जैसे वचन न दे जाना ,
हो अन्याय पांचाली जैसा, तो भीष्म पितामह जैसे मूक -बधिर ना बन जाना,
छल कपट सिखलाने वाले शकुनि बहुत मिलेंगे जीवन में,
उनके बहकावे में कहीं तुम, दुर्योधन ना बन जाना 11

Badi sundar abhivyakti
जवाब देंहटाएंDhanyawad
जवाब देंहटाएंवाह बहुत सुंदर..
जवाब देंहटाएंधन्यवाद्
जवाब देंहटाएंमहाभारत से महाकाव्य के संपूर्ण सार को चँद पँक्तियों मे वयक्त करने के सफल प्रयास हेतु हादिक शुभकामनाएँ ।
जवाब देंहटाएंवाह अद्भुत ।
जवाब देंहटाएंDhanyawaad
जवाब देंहटाएंहो अन्याय पांचाली जैसा, तो भीष्म पितामह जैसे मूक -बधिर ना बन जाना,
जवाब देंहटाएंwoh vachan badh the... phir toh vachan ka maan hi nahi rah jata.
वह विवश थे हस्तिनापुर के राजसिहासन के लिये..लेकिन अपनी पुत्रवधु को लज्जित होते देखकर चुप रहना कोई विवशता नहीं थी ..उनकी पीड़ादायक मृत्यु का एक कारण यह भी था..
हटाएंफिर तोह काफी चीजें है :
हटाएं१- कर्ण को ये बोलना की वह सूद पुत्र है , जबकि वह एक सच्चा योद्धा था।
२- छल कपट करके कर्ण से उसके कवच और कुण्डल मांग लेना क्या उचित था ?
३- पांडवों को उनकी अपनी पत्नी को जुए मैं लगा देना क्या उचित था ?
ये भी कुछ पॉइंट्स है । x
यह मेरा दृष्टिकोण है..तथ्य तो वे ही रहेंगे... ...महाभारत को देखकर सबका दृष्टिकोण अलग हो सकता हैं ...आपका दृष्टिकोण भी अलग़ हो सकता है :)
जवाब देंहटाएंhaan. correct ! :-) .
जवाब देंहटाएंIt depends how we take the information according to our-self.
मेरा दृष्टिकोण तोह ये है की , जो हुवा सही हुवा। और जैसा होना होता है वैसे ही विचार या मत्ति आती है ।
कभी कभी जिंदगी दोराहे पे ले आती है , वहां पर निर्णय लेना बहुत ही मुश्किल होता है क्योकि दोनों चीजें सही होती है और दोनों चीजें गलत।
वहां पे जो चुप रह जाते है उनको भी गलत या सही बोला जा सकता है , ये दृष्टिकोण ही है, की कोई सही बोलेगा कोई गलत।
Wahu NYC❤️❤️
जवाब देंहटाएंThanx Pooja
हटाएंPura mahabharat sabdo me piro dia ....
जवाब देंहटाएंThnx
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