शनिवार, 19 सितंबर 2015

चाय…कि वे चंद पत्तियाँ 


हरियाली फैलती वह पुरे कसबे की,
निखरी,जिवंत ,ऊर्जा से भरी वह,
चाय की वे पत्तियां 1
चुना जाता उन्हें प्यार से ,
टोकरी मे बिना जाता बहुत मिज़ाज़ से ,
सुबह की सुस्ती दूर करती वह ,
उबलते पानी की रंगत बदल देती वह ,
घुलती,मिलती हैं ऐसे ,जैसे न्यौछावर
कर रही हो अपना रस पानी में 1
चाय की पत्तियों ने सीखा घुल जाना,
रस बाटना ,प्याले को और अधिक
ऊर्जावान कर देना 1
बिना चाय की पत्ती का भला
क्या अस्तित्व हैं उबलते पानी का
जब डाले पानी मे ,तभी तो मिलती हैं
पहचान उसे 1
कुछ हम भी बने उस चाय की पत्ती के समान ,
जो किसी के  जीवन में घुल जाये ,
बाटे अपना रस ,भर दे ऊर्जा किसी के जीवन में
ताकि मिठास रहे ,हर चाय के प्याले में,
ताकि मिठास रहे ,जीवन के हर पल में 1