शनिवार, 19 सितंबर 2015

चाय…कि वे चंद पत्तियाँ 


हरियाली फैलती वह पुरे कसबे की,
निखरी,जिवंत ,ऊर्जा से भरी वह,
चाय की वे पत्तियां 1
चुना जाता उन्हें प्यार से ,
टोकरी मे बिना जाता बहुत मिज़ाज़ से ,
सुबह की सुस्ती दूर करती वह ,
उबलते पानी की रंगत बदल देती वह ,
घुलती,मिलती हैं ऐसे ,जैसे न्यौछावर
कर रही हो अपना रस पानी में 1
चाय की पत्तियों ने सीखा घुल जाना,
रस बाटना ,प्याले को और अधिक
ऊर्जावान कर देना 1
बिना चाय की पत्ती का भला
क्या अस्तित्व हैं उबलते पानी का
जब डाले पानी मे ,तभी तो मिलती हैं
पहचान उसे 1
कुछ हम भी बने उस चाय की पत्ती के समान ,
जो किसी के  जीवन में घुल जाये ,
बाटे अपना रस ,भर दे ऊर्जा किसी के जीवन में
ताकि मिठास रहे ,हर चाय के प्याले में,
ताकि मिठास रहे ,जीवन के हर पल में 1


गुरुवार, 9 जुलाई 2015


जंकशन पर गुजरता बचपन 

मासूम सी  सूरत इनकी ,खुला आसमान हैं जिनके लिए ,
ना पंखा ,ना  बिजली,जो हैं  प्रकृति की छाया पर निर्भर ,
जिन्होंने बचपन ना महसूस किया और गवा  दी ,
अपनी पूरी  ज़िन्दगी उस जंक्शन  पर,
धूल मे  सने ,हस्ते खेलते बच्चे वह ,
जिनके लिए पटरी ही हैँ  खिलौना ,
सिक्को को उछालते  ,पलटते ,
कभी कान लगाकर पटरी पर रेलगाड़ी की आवाज़े सुनते,
एक रोटी एक लिए भी  लहूलुहान झरप होती ,
तब पता चलता हैं क्या  कीमत हैं  रोटी की ,
विरासत मैं जिन्हे ,मिली  महज गरीबी  और लाचारी ,
सुबह से शुरू हो जाती जिनकी भीख मागने की शुरुवात ,
एक रोटी को भी बाटते वह, कड़कड़ाती ठण्ड मैं आसरा देखते वह ,
एक ही कम्बल पर रात बिताता पूरा परिवार ,
भारत भाग्य विधाता  से गूँज  उठता  भारत कभी,
पर उन  दुर्भागीयिओं  ,का क्या  जिनके लिए ,
भारत लाचारी,गरीबी,और पछतावा हैं,
क्या हैं गलती उनकी ,जो उनको  मिल गया वैसा संसार ,
पैदा ही भूखे हुए और जिनकी मौत की भी खबर  नहीं,
हम कहते हैं अपने आपको प्रतिषिथित  नागरिक भारत के ,
कहते हैं नेता,बाल मजदूरी रोको,
पर खुद अपनी चाय का पहला प्याला ,बनवाते हैं उनसे ,
भारत मे  हैं   योज़नाओं  का ताँता ,पर अमल ना कर सके हम  इन्हे,
लालफीताशाही की भेट चढ़  जाती  हैं ,यहाँ हर एक  योजना ,
हम  तो अपना भाग्य बनाते हैं ,पर कुछ का भाग्य तो पहले से ही निर्मित हैं,
बच्चो को गोद  लेने की परम्परा सीख ली है हमने ,
पर क्यों उन बच्चों की सूची मे उन बच्चो का भी नाम हो ,
आओ संवारे इन नन्हों को ,निकाले इन्हे पटरी से ,
और लेके आये इनका जीवन फिर  पटरी पर 1